Thursday, January 30, 2014

ओझाई के कमाई

        -: ओझाई के कमाई :-
     नीम के पेड़ जउना के जड़ी चउतरा से घेरा गइल रहे, गाँव के लोग चंदा करकें माई के स्थान बनवलें जहाँ सुक सोमार के गाँव के औरत लोग पुजा पाठ करे पहुचली, जउना के समय छौ बजे सें लेके नो दस बजे ले होला, औकरा बाद शुरु होला झार फुक के रोजी रोटी के जुगार, जेहके हमनी के गवइ भाषा में ओझाई कहीलें, उजरका धोती पहिरलें पंडीत जी नहा धोआ के तैयार हो जालें दस बजे से पहिलें,
    अब आई चलल जाव उनकर कमाई के तरफ, आज के पंडीत जी के बारें मे बतावे से पहिले बता दी उनका ओझाई उनकर बाबुजी से विरासत में मिलल रहल, ओहसे पहिले पान के गुमटी छोटका बजार पर रहें जेहसें उनकर परीवार चलत रहे, बाबुजी के गुजरला पर उनकर कास्टमर नयकु के मिल गइल, धीरे धीरे बजार छोड़ उ घरही सेट हो गइलें, उनका से हमार बहुत नजदिकी होए के कारण उनकर रग रग पहचानत रहनी, सोरह आना मे बारह आना मरीज के अंग्रेजी आ हेमियो पैथी से ठिक करेले, चार आना मरीज के जुुगार तरीका अपना कें, कपार बथे के बहाने हम केतना बार आपन कपार दबवा लेहले बानी उनका सें..
    पहीले सुक सोमार के बीस पच्चीस लोग के आसपास जुटत रहें जउन एह घड़ी बढ़ के चार सौ पाँच सौ हो गइल, भीड़ बढे के कारण के बात करी त रउआ अचकचा जाइम बाकी साँच ह, बात आज से सात साल पहिले के बा उनकर रिश्तेदार (हित)आरा जीला के हवे जे दिल्ली के मुख्यमंत्री शिला दिक्छित के बोडीगार्ड बारें, जे इनका बारे मे बढा चढ़ा के परोस दिहलें, फिर का रहल बाबा खातिर फ्लाईट के अपडाउन टिकट कट गइल, एक दु बार ना बाबा दसो बार गइले उहाँ आ भारी कमाई कर के लउटलें, इहा तक की हारे ओ गइला पर पहुच गइले उहाँ..
   शिला के पास गइला के बाद उनकर कस्मर में भाड़ी बढोतरी भइल, लोग भी बाबा के चमत्कार से हप्फ रहे, इहे रहे भीड़ बढ़े के मुल कारण, आज भी हम गाँवे जाइला त रोजे पचरा उनका मुहें सुनेला मिलेला, टाइम बदलाव भइल अब सुक सोमार ना, पुरा हफ्ता सुबेरे ६ से १२ बजे तकलें बाबा के ओझाई चलेला, मोबाइल डबल सिम के माइक्रोमेक्स जउना मे भरत व्यास के पचरा,
--धोवत धोवत तोहरी मंदीरवा हथवा खिअइले हो अरे तबो काहे नाही मइया दया तोहरा अइले हो...
   आज तक उनका कमाई पर नजर डालम त pmch डाक्टर के कमाई सें उपर बहुच जाई, तीन कित्ता जमीन के साथे दुतल्ला मकान हमार गाँव मे दुरे से पहचान मे आ जाला, दस गाँव दुरे रहम त उनकर नाम के चर्चा सुने ला मिल जाई..."
     बाबा के ओझाई  से उनकर घर ही ना परोस भी खुश रहेला, काहेकी लड्डु पेरा के चढावा एतना आवेला की ओकर खपत पास परोस मे करे परेला, सिक्का अठ्न्नी चवन्नी के जमाना के ओझाई हजारी के बजारी मे पहुच गइल बा,हम उंगली ना उठा सकिले काहे की पेरवा हमहु खइले बानी....
    बबलु शर्मा....
   

Monday, October 14, 2013

डरेरा हमरा मे परेला

कउनो गाँव एहसें बचल ना बा,  हमनी के बहुत लोग कें जिनगी सें जुरल बा, चाहे हमार होए चाहें गाँव कें कउनो परीवार कें, सुपरा साफ कर देवेला ई जमीन के डरेरा.....रोटी प निमक तेल लगावे पर मजबुर करेला ई डरेरा, खुरपी के काटल झुर होई चाहें ईटा कउनो मजबुत, सबकें उखाड़ फेकेला इ डरेरा के झमेला, आई इनकर महान काज के कुछ बखान करे के कोशीस करल जाव,उम्मीद ह हर गाँव के लोग के नीक लागी...
  
      पुरनका बाबाआन पर कान कटावें ला लंगोट कसलें रहेलन, एगो बात अपना खिलाफ ना सुन सकेलन,सुबेरे सुबेरे लोटा के साथें खुरपी उठाँ के चल देवेलन चवरा, ओनही सुबेर के क्रिया करम करकें खेत घुमें खातीर निकल गइलें,खुरपी साथ मे रहे उनका जउना सें आपन पारी खातीर धास भुसा कें जुगार करलेहलें,साथें साथ आपन खेत भी देखे खातीर ओह ओरी के रुख कर देहलें, पास पहुचला पर देखलें पिछलका साल अमीन साहब जे झुर गरवइलें रहें दुसरका तरफ सें उखाड़ दिहल गइल बा,बाबा के बल्ड प्रेशर हाई,, तुरन्ते खुरपी निकाल कें दुसर तरफ दु हाथ बढ़ा के गार दिहलें, आ बिना केहु से कुछ कहलें चुपचाप धास के मोटा लेके अपना घरें पहुच गइलें....
   
       उपदर त तब शुरु भइल जब दुसर पार्टी खेत धुमे पहुचल, देख के सीधा बाबा के दुआर पर चढ़ाई कर देहलक, दुनो लोग के शांत कइलक गाँव के कुछ समझदार लोग,जेहसे ओह वक्त शांत हो गइल,
   फेर उहें बात के लेके भइल जोड़दार धमाका कब? जब जोतनी के टाइम आईल तब, तब जानदार मुकाबला भइल लागें गाँव मे उहे दु जानी बरले बारें, बात बिगरत बिगरत थाना में पहुच गइलें, जउना के नतीजा केस भईल बाबा के नामें, जउना मे कपार फोड़ के इल्जाम लागल,बाबा के इहो आरोप रहें की उ जान से मारे के कोशिश कइलें हमरा कें....
    अब दुनो जानी के जमीन के बखान कर देवत बानी, बाबा के खेत सावा कट्ठा(एक कट्ठा पाँच धुर) लम्मा जमीन रहें,कीमत ओकर 12000 रुपया, ठिक उनकर सामनें के जमीन चार कट्ठा 40000 के आस पास जमीन के कीमत उनकरो रहें, ई कीमत ह 1995 के आसपास कें, जेह खातीर पिछलका साल लें केस लड़त रहलें दुनो पार्टी, हर तीन महीना बात तारीख जउना के फीस 1000 कें पत्ता देवे परत रहें दुनो पार्टी कें, शुरुआत मे 500 के हिसाब से चलल 7 साल के लगभग ओकरा बाद 1000 के हिसाब चले लागल, चलें लागल कहल विश्वासघात होई, इ कही की दउरे लागल.....
   बाबा धन लुटाईल -60000 के आसपास
   दुसर पार्टी के लुटाईल -60000 के आसपास
फायदा मे के बा समझ सें परे बा, 12000 के जमीन के झुर डरेरा खातीर एतना बखेरा,जउना से दुनो पक्ष के लोग परेशान भइलें, हम इ हिसाब बाबा के समझउनी बहुत प्यार सें ताकी उनका बुरा ना लागें,हम कहनी अगर डरेरा कें एतना फीकीर रहें त रउआ सरकारी अमीन बोला कें बलाबंदी करवाली,तीन फुट के पिलर गाँड दिहीत जउना कें सरकार खुद जिम्मेदार रहीत, जेतना पइसा बर्बाद भइल राउर केस फौदारी में ओतना में पाँच कट्ठा आउर खरीदा जाइत..
       बाबा के कहनी साँच बताई...?
डरेरा भला केहु मे परेला?
डरेरा त बनउला से बनेला
बस प्यार मुहब्त के खुरपी सेे
एहपें माटी चढढला से चलेला
डरेरा भला केहु मे परेला?
घर दुआर के सुख शान्ति छिनेला
इहे लुटावे रुपया इहें रगरा किनेला
एकरा से त अब काया रोएला
डरेरा से सरकार के खर्चा चलेला
ए बाबु डरेरा केहुमें ना परेला..!!!
     वकील बाबु के मुह से सुननी.....
जउन डरेरा पर खुरपी कुदाली लाठी चलेला
उहें डरेरा हमरा घरें खीलेला फुलेला फरेला,
जब जब डरेरा टुटेला पइसा फुल नीयन झरेला
साँच बात त ई ह सब डरेरवा त हमरे मे परेला....!!!
   

Wednesday, October 2, 2013

समाज मे फइलल खोट

लोग के मन उमरल पैर खीचे के खोट
पइसा मीले के चाही बस इनका मोट,,
अक्कील के आंधर मुह के फुहर समाज
बुध्धी बगैर सब पीछुआइल बा आज,,
काम काज दुसर दिन पर थोपलें काका
किस्मत के परल सायकील सें चापा,,
का करी रघुआ बेचारा बाबुजी के बगैर
कापी कलम सें बा उनका जनम के बैर,,
देखी किस्मत आउर केतना खेल खेली
बैरी पढ़ाइ कें लोग आउर केतना दुख झेली,,
नाही नाता हमसें समाज के कउनो लोग सें
बड़ा खुश होला लोग बबलु के वियोग सें...

Thursday, September 19, 2013

चुटकुला हिन्दी में...

एक शायराना चुटकुला
वो बोले “महफिल में कहीं हमारे जूते खो गए अब हम घर कैसे जाएंगे?”
हमने कहा “आप शायरी शुरू कर दीजिए इतने आएंगे कि फिर गिन भी नहीं पाएंगे.”

लड़के और लड़की की बातएक लड़का रास्ते में चलते-चलते ठोकर खाकर गधे के सामने गिर गया.
उसी वक्त वहां से एक लड़की गुजर रही थी,
उसने लड़के को छेड़ते हुए कहा: अपने बड़े भाई का आशीर्वाद ले रहे हो क्या ?
लड़के ने जवाब दिया, आपने सही फरमाया भाभी जी.

शराबी चुटकुलासंता शराब पीकर लौटा,
और घर का ताला खोलने लगा, लेकिन हाथ कांपने की वजह से खोल नहीं पा रहा था.
बंता : ला दे यार, ताला मैं खोल देता हूं.
संता: ताला मैं खोल लूंगा, तू सिर्फ मकान पकड़ ले.

शादी का लड्डूपत्नी : आपको पता है, आपका दोस्त एक पागल लड़की से शादी करने जा रहा है.
पति : तो मैं क्या करूं.
पत्नी : अरे, आप उसे रोकेंगे नहीं?
पति : क्यों रोकूं?  उस साले ने मुझे रोका था क्या?


Monday, September 16, 2013

नया समाज के बदलल विचार

आस निराश मे आपन समाज आज बेहाल बा,पर नया युग के साथ साथ चल रहल आपन नौजवान भाई लोग के बहुत बड़ा उपकार ह की आज भोजपुरीया समाज के कुछ हद तक,इज्जत बढ़ल बा, आज बीहार के आगे लावे में सबसे बड़ा हाथ कउनो नेता मंत्री के ना,हमार समाज के नया होनहार लइका लोग के बा,जे आजकल के परीवेश मे उहे आधार पर चल रहल बारे जइसन एह वक्त जिये ला उपयुक्त माहौल बा,आजकल के पढ़ल लीखल लइका जहां तम्बाकु,बीड़ी,सीगरेट,शराब से तौबा कर रहल बा,लागत ह जइसें जन्म के बैर ह नशा से,हमनी के युग मे दसवी क्लास के लइका में जहां28%तम्बाकु (खैनी) खाय वाला लोग रहे उ आज सर्वे में6% रह गइल बा, इ एक तरह से बहुत ही बढ़िया सोच उभर के आइल बा लोग के सामनें,अगर रउआ छोट मोट शहर के बजार छोड़ दी त दारु पीये वाला में भी भारी कमी आइल बा,एहसे सरकार के बहुत नुकसान हो रहल बा,लेकीन फायदा हमनी के आपन समाज के बहुत भइल बा, पर हमनी के हार में ही हमनी के समाज आ संसकार के हार बा ,इ बात आज कल के युवा लोग बहुत अच्छा तरहसे जान गइल बारें,आ फेर से सभ्य समाज के वापसी ला लोग हमेशा हर छेत्र मे प्रयास कर रहल बारें,,,
अब हमनी के कुछो सोचें ना परी
लोग आहें बढीहे देह केतनो जरी,
जेहरी के धन बहुत लुटइले बानी
अब चुल्हा भी आपन शान से जली,
सरकार के सहयोग ना मीले त का
हमनी के दुआर पर ढिबरीयो ना जरी.?

Friday, September 6, 2013

हमार बचपन

कुछ कहें से पहीले हम बतावे चाहत बानी आपन परिचय के बारें मे,हम बीहार छपरा जीला के दिघवारा प्रान्त के नजदीक गाँव मोहन कोठीयाँ के रहे वाला बानी,गाँव के बहुत ही गरीब अवस्था मे हमार बचपन गुजरल बा,लपटउआ रोटी लेहके स्कुल के तरफ रवाना होत रही स, सब दोस्तन लोग खाते खाते स्कुल के ओर रवाना हो जात रही,स्कुल के फीस दस रुपया रहे जेहके परीवार वालन के उठावे में बहुत दिक्कत होत रहे, आ होए भी त काहे ना दुसर कोई भी रास्ता ना रहे पइसा पास मे आवेके,दादाजी के कमाई रहे जेहसे छोट परीवार हमार बहुत ही पइसा के किल्लत सें,खुशी पुर्वक चलत रहे, भगवान के दया ह की आजकल हम उ जमाना से उबर गइल बानी,आजकल शहर के जीवन मे आपन काम काज में लागल बानी,जेहसे घर परीवार खुशहाल बा हमार मेल आई डी ,,mohankothiyan@gmail.com  फेसबुक के एगो हमार पेज बा आपन घर दुआर- जेहसे हम प्रयास करीला बाह परदेश मे बसल लोग के एक जुट करेके,हम त इ मानीले बीहार के झुठ मुठ के बदनाम कइल जाला,जबकी बीहार मे अभी आउर कउनो प्रान्त से संसकार,सुविचार बहुत बडीया बा,हा कुछ लोग के पास पइसा के अभाव बा जेहके उ लोग मेहनत से दुर करे खातीर दिन रात लागल बा लोग.
       दुख के हरे वाला भगवान कब खुश होइहें, ,इ एगो सवाल हर वक्त हमार दील मे बसेला,बाकी भागवान के एहमें कउनो दोश कइसे लगाई जब सारा अवगुण के खान हमार आपन समाज ही बा,