साल में दु बार घरें जाए के परम्परा पर गरहन लाग गइल", दुनो वक्त मे पाँच छे महिना के फासला बाटें जउन साल कें दु भाग में बाटेंला -एगो छठ दिवाली दशहारा दुसरा ओर होली वसंत पंचमी....
सरकारी छुट्टी त ओह दीन मिल जाला बाकी पुरा समाज सें मिले के मौका बहुत कमें मिलेला,जुग जादें पुरान ना ह जब पुरनीया लइका के पैतीस साल लें खेलेकुदे वाला उमर कहत रहलें,आज से तकरीबन 20/25 साल पिछें देखम त आँख के सोझा उ दिन देखाई दी, जब पैतीस लें लोगबाग लइके रहत रहें....
समय के अनुसार जमाना बदलल, अब लोग पन्द्रह पार कहत बारें लोग कमाई ना त खाई कहाँ सें,आज सारा दुख दर्द गरीब भाईलोग कें अंगोछा में समेंटा गइल बा भुजा के जगहा, कबड्डी पक्का के सड़क प रोजे नौ बजें आधा भोजपुरी खेलत चल देवेलें रोजी रोटी के बनबस करें...जउन मुहें आवाज आवें चाही कब्ड्डी कबड्डी कबड्डी..... उहें मुहें सुनात बा कब बढी कब बढी कब बढी कब बढी....... का त सैलरी जेहारी.. "
दिपावली के दिन में रुक जाला लोग की एक महीना के पइसा आ मिठाई के डब्बा त मिलबें करी,ओइसही होली में सोचेला लोग का घरें जाएकें बा दु दिन के छुट्टी लेके, इहीजगहा बेरा पार हो जाव, रंग अबीर भौजाई लोग सें खेलला याद करेम त केतना साल हो गइल होई,केतना दिन गुजर गईल होई चाचा काका बाबुजी माई के पउआ पर अबीर रखला...अब खाली लोग इहे चाहेला हाव पइसा हाव पइसा, ए पइसा के पिछे पुरा जहान परल बा, जउन ना कभो पुरा भईल ना होई....
केनहु लुका गईली भौजाई उ जे कवारी के पिछें लुका के देवर लोग के बाट जोहत रहली,चुप हो गइल हमार परंपरागत हुरदंग देख के जमाना, ना बोलेली गउआ के दादी अब..... रे उ तोहर भौजाई ना चाची लागी... साल भर बाद भौजाई से मिलला पर अनचिन्हार होत आपन लोग पहेली सुलझा देवत रहें, काहे की कनिया पुतरी जरुरी ना ह सभें भौजाई होए,चाची दादी पतोह भी हो सकेला, इ जान पहचान पुरनीया लोग करावत रहें....
गाँव में जोगीरा देवीस्थान सें शुरु होत रहें पारापारी हर घर के दुआर पर गवात रहें, आजुओ बा बाकी हम परदेशी बानी त ना के माफीत मानीला, गवइया आ झुमइया खातीर एक सें एक जोगीरा कढावेवाला कढवइया रहेंलोग, कुछ कुछ याद आ रहल बा "जइसें केहु के दुआरी पर स्वागत के तैयारी अइसनो रहें, दवाई छिटेंवाला मशीन (गटोर मशीन) जेहके कहल जाला बाल्टा में घोर कें हरीयरका राइफल खानी चला दियात रहें,बाद मे गरी छुहारा काजु किसमीस से मनावल जात रहें छड़ियाइल भाईलोग कें"कुछ लोग त अइसन छड़िया जास की जन्मघुट्टी पिवावे परत रहें "....;;
बबलु शर्मा
Friday, March 14, 2014
पुरनका होली
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