Thursday, February 13, 2014

कर्म के फल मुअलो ना ओराई

रोइ के गुहार जनि करी ए भाई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
सब उनकर पुत सपुत कपुतो हवें
टुअर अनाथ अधर्मी लरपुतो हवें
सुघर जिनीगीया इहें सोची बिताई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
उनके चरल रामायण महाभारत
उनके शरण में नर नारी ॠषि नारद
का करेम रउआ उनका से अगुताई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
आज नादान कल चलाक होई जाइम
लुटल करम देखी कभो चिहाइम
साँच के राह पे जनी चली हिचकाई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
पागल लोग मरमो ना जानी राउर
निक बात ओहके लागी बाउर
लोग हसीं आपने खिल्ली उड़ाई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
जाए के घरीया रोइहे पगलवा
लगिहें उनके निकसें परनणवा
बाकी याद करी लोग दिहें दुहाई
कर्म के फलवा मुअलो ना ओराई।।
पइसा कौड़ी जग मे सभें कमाए
दु पइसन के खातिर नाम गवाए
बहुत होई दुर्गति होई जग हसाई
कर्म के फलवा मुअलो ना ओराई ।।

दुसरका ह....सुनि सभे

बरा रे बेदर्दी निरदइ बेदरद ह जमाना
लुट गइल,"कबहु ना मिलेला खजाना
रहे लटकल मुहवा," तरसे तरपावेला
देखि हलतिया परदेश,"मुह बिचुकावेला..!
चान सुरजवा इहउ," देखि उहे त बाटें
लोभी तन कें," रुपीया रियाल देहिया चाटें..
ना भावे कुछहु रें,"लोग के बोली बचनिया
आव आव लउट," फेरु तरेगना चंदनिया...!!

#भोजपुरी

पुरनियां

बहुत पुरान होला के मतलब पुरनिया, इ उमर के उ पड़ाव ह जहाँ सें बचपन उल्टा गिनती शुरु करेला, जइसे जइसे लोग पुरनिया होत जालें हरकत लइकाई वाला करें लागेलें जा..
  हमनी के समाज में उनकर उपहास बहुते अजीब तरहा से उड़ावे ले लोग, खास करकें उनके बेटा पोता चाहें चलाक दुसरो लोग, जे भुल जाले की ....

हमरो जिनगी मे इ दिनवा एक दिन आई,
तब राउरो बेटा पोता करीहें एहके भरपाई,
ना टुटी ना रोटी,बांध ना पाईम आपन लंगोटी,
पलंग छिनाई मिल जाई फाटल गेनरा चटाई..
जांगर देह सुखी झुली लाठी के सहारें
नोचें वाला चिल्होर दुनियाँ में बहुते बारें
झिझिरी खेलतें रही जाईम नदिया बिचे
अबही उमर बहुतें,उबलाई जन बइठी किनारें..
   

Monday, February 10, 2014

आजुओ हम गरीब बानी

काहे ला करी तहसें निस्तानी
अमिरवन संघे जंग जुबानी
जानत बानी हार जाईम
चली नाही हमार मनमानी,
ॠगार के भुखाईल शरीर बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!
केतना दीन रहबु तु घघाईल
चुपचाप देखम तहार अगराईल
रोजी रोटी करम के लेखा
सब गुण रहते करी अनदेखा
पुरनकी मुरचाईल जंजीर बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!
जिनगी बसवारी खानी ह
लोग कहेले इ चलानी ह
ठंडी में उहें कुदारी चलावस
ना उखड़ला पर कहस उहें
इ बसवारी खानदानी ह,
सिजन मे हम खरीफ बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!
छाती प मुँग दरात बावे
इ दरद उनकर कराह बावे
दमरी फेकी नाच नचावें
इ दरदो उनका खुबे भावें,
दहार में पवरत अधीर बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!