रोइ के गुहार जनि करी ए भाई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
सब उनकर पुत सपुत कपुतो हवें
टुअर अनाथ अधर्मी लरपुतो हवें
सुघर जिनीगीया इहें सोची बिताई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
उनके चरल रामायण महाभारत
उनके शरण में नर नारी ॠषि नारद
का करेम रउआ उनका से अगुताई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
आज नादान कल चलाक होई जाइम
लुटल करम देखी कभो चिहाइम
साँच के राह पे जनी चली हिचकाई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
पागल लोग मरमो ना जानी राउर
निक बात ओहके लागी बाउर
लोग हसीं आपने खिल्ली उड़ाई
कर्म के फल मुअलो ना ओराई।।
जाए के घरीया रोइहे पगलवा
लगिहें उनके निकसें परनणवा
बाकी याद करी लोग दिहें दुहाई
कर्म के फलवा मुअलो ना ओराई।।
पइसा कौड़ी जग मे सभें कमाए
दु पइसन के खातिर नाम गवाए
बहुत होई दुर्गति होई जग हसाई
कर्म के फलवा मुअलो ना ओराई ।।
दुसरका ह....सुनि सभे
बरा रे बेदर्दी निरदइ बेदरद ह जमाना
लुट गइल,"कबहु ना मिलेला खजाना
रहे लटकल मुहवा," तरसे तरपावेला
देखि हलतिया परदेश,"मुह बिचुकावेला..!
चान सुरजवा इहउ," देखि उहे त बाटें
लोभी तन कें," रुपीया रियाल देहिया चाटें..
ना भावे कुछहु रें,"लोग के बोली बचनिया
आव आव लउट," फेरु तरेगना चंदनिया...!!
#भोजपुरी
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