Monday, October 6, 2014

चमचा के चमचई

बिदेश के विजा प चेपाइल शनिचरा गरह....

बात हवें 2009 के,' तब घरही रह के एगो एजेन्ट(मंसुर मिया) हमरा गाव से सात गाँव बीच करके उनकर घर परि,' हम आ हमार गावें के रिस्तेदार एक जानी हमार मामा लगिहें,' दिना नाम ह उनकर," दुनो जानी विदेश जाए खाति तइयार रहनि,' माने इंचरव्युह मेडीकल हो के विजा तइयार रहें,'बड़का एजेंटवो कांल करके कहलस की दस दिन के भीतर पहुच जा ना त पचीस हजार चेपा जाई तहरा कापारें....
   इ सब बात मंसुर भाई हमरा से कहलें,' आ कहले की बम्बई दस दिन के अंदरे पहुचेला बा,बोरिया बिस्तर ले के,' माने उड़िए जाए के बा... एतना बात सुनाके चल गइले उ, अगीला दिन 8 बजें से पहिलही दिघवारा टिसन पर रिजरवेशन खाति चल देहनी, बोलबम एगो जगही के नाम ह जहाँ से टेम्पु मिलेला,' दु रुपिया दे के दुनो जानी टेम्पु प बइठ गइनि...
    टेंम्पु मे हमरा साथे तीन चार जानि आउरो रहलें,अनजान... आ ओहि जगहा चवरा मे दु दिन पहिलही बस लुटले रहलन स,' लुटेरा के त हम ना जानत रहनि बाकी, हमरा दिनवा मे बातचीत इहे बात ले के होए लागल,' उहो अइसन बात करे लागे की ओकरा पुरा पता बा लुटरवन के अड्डा,' साफ कहे की बगल के गाँव वाला ही लुटले रहे बस कें,' हम समझनि की फेकत बा लेपटत रहे मे का बुराई बा...
   बाकी इ सब बातवा टेंम्पुआ मे बइठल एक जानि बड़ा ध्यान से सुनत रहलें," दिघवारा पहुचतें टेम्पु के किराया दे के," स्टेशन के ओरि दुनो जानी चल देहनि,' टिकट काँउन्टर प चार पाँच गो लोगे रहे,' हम रिजर्वेशन फारम ले के भरे लगनि,"पहिले ओकरे भर देहनि बादि मे आपन शुरु कइनी...
   जइसहि नाम लिखनी तइसही सिबील डरेस मे दु गो चकुदार साथें एक जानी सिंढी पर चढल लगे आ गइलें," दिनवा से पुछले कहाँ जाए के ह,' बोललस - बम्बई कहके चुपचाप खाड़ रहलें, हमार फार्म जमा करवा दिहले उहे सिवील डरेस वाला,' पइसा देके वेटीग मिल गइल दुनो जानी के,' तब सिवील डरेस वाला कहलक कि हम रउआ लोग से दस मीनट बात करें चाहत बानी चली साथें,' चकुदार देख के हमार त करेजा कापे लागल दिनवा के त कंठे रुन्हा गइल रहें....
    हम बाकी सारा मामला समझ गइनी उनका साथे थाना मे पहुचतें,' एगो दिमाग एक लाख के मोटाह पइसा पर रहें, दुसरका थाना पुलीस के लफरा पर...माने की परान सिकहर प...खैर दुनो जानी के लेके सिवील डरेस वाला बड़ाबाबु पहुच गइले थाना मे,'जउन स्टेशन से दु मिनट के रास्ता रहे...चाय के आडर दे दिहले आ हमनि से पुछताछ शुरु.....
   कहले की हमरा पता चलल ह की तहरा लोग के पता ह बस के लुटे वालन के बारे में,' पुरा पोल्हा फुसला के कहले की बतावऽ अगर पता बा त,'हम तहरा लोग के नाम उजागर ना होए देहम...दिनवा के बोले से पहिलही हम बोल परनि.. के कहलस ह रउआ से,' अच्छा टेम्पुआ मे बात करत रहनी त एक जानि बड़ा ध्यान से सुनत रहले, लागऽता उहे कहले ह रउआ सें...?
   बड़ा बाबु कहले की "ह... हम कहनि की हम त इ बात ना कहनि ह कि के लुटले बा,' आ इहो ना कहनि ह की हम जानत बानी डकइत के,' हमनि के आपस मे इहे बात करत रहनि ह की लुटेवाला दुसर जगहा के ना आसेपास के होइ..एकनिए के लुट पाट करेलन स, सुनल बात के हमनि के बतिआवत रहनि ह, एह से जादा कुछुओ ना जानत बानी स....
   बड़ा बाबु आदमी सही सही रहलें हमरा खाति,' कहले की एगो काम करऽ लोग आपन नम्बर हमरा के दे दऽ आ हमार नम्बर तु दुनो जानी ले लऽ...नम्बर बटा गइल त कहले की कउनो अइसन बात होई त हम बोलाइम..एतना कहके कहले की अब जा लोग....
   अब हमनी के चुपचाप बाहर निकलनी,' ना दिनवा बोलऽता, ना हमरा मुहें कुछ निकलऽता,' एक एक दिन काटल मुहाल भइल रहें," डर लागत रहे की पता ना कब फोन करि के बोला लेवे उ...खैर शनिचरा गरह रहें उ दीन एक एक दिन कट गइल," आ उहो दिन आ गइल की हमनी के बम्बई चलि अइनी,' जब प्लेन मे बइठ गइनी तब साँस मे साँस आइल,' ना त पइसा त डुबले रहे साफ बुझात रहें....!
    अब रउआ के बता दी, टेम्पु मे बइठल जासुस रहे एगो मिया...जउना के दु साल बाद पता लगाईए लिहनी...बाकी कुछुओ ना कहनि" छोड़ देहनि....!!