-: ओझाई के कमाई :-
नीम के पेड़ जउना के जड़ी चउतरा से घेरा गइल रहे, गाँव के लोग चंदा करकें माई के स्थान बनवलें जहाँ सुक सोमार के गाँव के औरत लोग पुजा पाठ करे पहुचली, जउना के समय छौ बजे सें लेके नो दस बजे ले होला, औकरा बाद शुरु होला झार फुक के रोजी रोटी के जुगार, जेहके हमनी के गवइ भाषा में ओझाई कहीलें, उजरका धोती पहिरलें पंडीत जी नहा धोआ के तैयार हो जालें दस बजे से पहिलें,
अब आई चलल जाव उनकर कमाई के तरफ, आज के पंडीत जी के बारें मे बतावे से पहिले बता दी उनका ओझाई उनकर बाबुजी से विरासत में मिलल रहल, ओहसे पहिले पान के गुमटी छोटका बजार पर रहें जेहसें उनकर परीवार चलत रहे, बाबुजी के गुजरला पर उनकर कास्टमर नयकु के मिल गइल, धीरे धीरे बजार छोड़ उ घरही सेट हो गइलें, उनका से हमार बहुत नजदिकी होए के कारण उनकर रग रग पहचानत रहनी, सोरह आना मे बारह आना मरीज के अंग्रेजी आ हेमियो पैथी से ठिक करेले, चार आना मरीज के जुुगार तरीका अपना कें, कपार बथे के बहाने हम केतना बार आपन कपार दबवा लेहले बानी उनका सें..
पहीले सुक सोमार के बीस पच्चीस लोग के आसपास जुटत रहें जउन एह घड़ी बढ़ के चार सौ पाँच सौ हो गइल, भीड़ बढे के कारण के बात करी त रउआ अचकचा जाइम बाकी साँच ह, बात आज से सात साल पहिले के बा उनकर रिश्तेदार (हित)आरा जीला के हवे जे दिल्ली के मुख्यमंत्री शिला दिक्छित के बोडीगार्ड बारें, जे इनका बारे मे बढा चढ़ा के परोस दिहलें, फिर का रहल बाबा खातिर फ्लाईट के अपडाउन टिकट कट गइल, एक दु बार ना बाबा दसो बार गइले उहाँ आ भारी कमाई कर के लउटलें, इहा तक की हारे ओ गइला पर पहुच गइले उहाँ..
शिला के पास गइला के बाद उनकर कस्मर में भाड़ी बढोतरी भइल, लोग भी बाबा के चमत्कार से हप्फ रहे, इहे रहे भीड़ बढ़े के मुल कारण, आज भी हम गाँवे जाइला त रोजे पचरा उनका मुहें सुनेला मिलेला, टाइम बदलाव भइल अब सुक सोमार ना, पुरा हफ्ता सुबेरे ६ से १२ बजे तकलें बाबा के ओझाई चलेला, मोबाइल डबल सिम के माइक्रोमेक्स जउना मे भरत व्यास के पचरा,
--धोवत धोवत तोहरी मंदीरवा हथवा खिअइले हो अरे तबो काहे नाही मइया दया तोहरा अइले हो...
आज तक उनका कमाई पर नजर डालम त pmch डाक्टर के कमाई सें उपर बहुच जाई, तीन कित्ता जमीन के साथे दुतल्ला मकान हमार गाँव मे दुरे से पहचान मे आ जाला, दस गाँव दुरे रहम त उनकर नाम के चर्चा सुने ला मिल जाई..."
बाबा के ओझाई से उनकर घर ही ना परोस भी खुश रहेला, काहेकी लड्डु पेरा के चढावा एतना आवेला की ओकर खपत पास परोस मे करे परेला, सिक्का अठ्न्नी चवन्नी के जमाना के ओझाई हजारी के बजारी मे पहुच गइल बा,हम उंगली ना उठा सकिले काहे की पेरवा हमहु खइले बानी....
बबलु शर्मा....
Thursday, January 30, 2014
ओझाई के कमाई
Subscribe to:
Posts (Atom)