Monday, October 14, 2013

डरेरा हमरा मे परेला

कउनो गाँव एहसें बचल ना बा,  हमनी के बहुत लोग कें जिनगी सें जुरल बा, चाहे हमार होए चाहें गाँव कें कउनो परीवार कें, सुपरा साफ कर देवेला ई जमीन के डरेरा.....रोटी प निमक तेल लगावे पर मजबुर करेला ई डरेरा, खुरपी के काटल झुर होई चाहें ईटा कउनो मजबुत, सबकें उखाड़ फेकेला इ डरेरा के झमेला, आई इनकर महान काज के कुछ बखान करे के कोशीस करल जाव,उम्मीद ह हर गाँव के लोग के नीक लागी...
  
      पुरनका बाबाआन पर कान कटावें ला लंगोट कसलें रहेलन, एगो बात अपना खिलाफ ना सुन सकेलन,सुबेरे सुबेरे लोटा के साथें खुरपी उठाँ के चल देवेलन चवरा, ओनही सुबेर के क्रिया करम करकें खेत घुमें खातीर निकल गइलें,खुरपी साथ मे रहे उनका जउना सें आपन पारी खातीर धास भुसा कें जुगार करलेहलें,साथें साथ आपन खेत भी देखे खातीर ओह ओरी के रुख कर देहलें, पास पहुचला पर देखलें पिछलका साल अमीन साहब जे झुर गरवइलें रहें दुसरका तरफ सें उखाड़ दिहल गइल बा,बाबा के बल्ड प्रेशर हाई,, तुरन्ते खुरपी निकाल कें दुसर तरफ दु हाथ बढ़ा के गार दिहलें, आ बिना केहु से कुछ कहलें चुपचाप धास के मोटा लेके अपना घरें पहुच गइलें....
   
       उपदर त तब शुरु भइल जब दुसर पार्टी खेत धुमे पहुचल, देख के सीधा बाबा के दुआर पर चढ़ाई कर देहलक, दुनो लोग के शांत कइलक गाँव के कुछ समझदार लोग,जेहसे ओह वक्त शांत हो गइल,
   फेर उहें बात के लेके भइल जोड़दार धमाका कब? जब जोतनी के टाइम आईल तब, तब जानदार मुकाबला भइल लागें गाँव मे उहे दु जानी बरले बारें, बात बिगरत बिगरत थाना में पहुच गइलें, जउना के नतीजा केस भईल बाबा के नामें, जउना मे कपार फोड़ के इल्जाम लागल,बाबा के इहो आरोप रहें की उ जान से मारे के कोशिश कइलें हमरा कें....
    अब दुनो जानी के जमीन के बखान कर देवत बानी, बाबा के खेत सावा कट्ठा(एक कट्ठा पाँच धुर) लम्मा जमीन रहें,कीमत ओकर 12000 रुपया, ठिक उनकर सामनें के जमीन चार कट्ठा 40000 के आस पास जमीन के कीमत उनकरो रहें, ई कीमत ह 1995 के आसपास कें, जेह खातीर पिछलका साल लें केस लड़त रहलें दुनो पार्टी, हर तीन महीना बात तारीख जउना के फीस 1000 कें पत्ता देवे परत रहें दुनो पार्टी कें, शुरुआत मे 500 के हिसाब से चलल 7 साल के लगभग ओकरा बाद 1000 के हिसाब चले लागल, चलें लागल कहल विश्वासघात होई, इ कही की दउरे लागल.....
   बाबा धन लुटाईल -60000 के आसपास
   दुसर पार्टी के लुटाईल -60000 के आसपास
फायदा मे के बा समझ सें परे बा, 12000 के जमीन के झुर डरेरा खातीर एतना बखेरा,जउना से दुनो पक्ष के लोग परेशान भइलें, हम इ हिसाब बाबा के समझउनी बहुत प्यार सें ताकी उनका बुरा ना लागें,हम कहनी अगर डरेरा कें एतना फीकीर रहें त रउआ सरकारी अमीन बोला कें बलाबंदी करवाली,तीन फुट के पिलर गाँड दिहीत जउना कें सरकार खुद जिम्मेदार रहीत, जेतना पइसा बर्बाद भइल राउर केस फौदारी में ओतना में पाँच कट्ठा आउर खरीदा जाइत..
       बाबा के कहनी साँच बताई...?
डरेरा भला केहु मे परेला?
डरेरा त बनउला से बनेला
बस प्यार मुहब्त के खुरपी सेे
एहपें माटी चढढला से चलेला
डरेरा भला केहु मे परेला?
घर दुआर के सुख शान्ति छिनेला
इहे लुटावे रुपया इहें रगरा किनेला
एकरा से त अब काया रोएला
डरेरा से सरकार के खर्चा चलेला
ए बाबु डरेरा केहुमें ना परेला..!!!
     वकील बाबु के मुह से सुननी.....
जउन डरेरा पर खुरपी कुदाली लाठी चलेला
उहें डरेरा हमरा घरें खीलेला फुलेला फरेला,
जब जब डरेरा टुटेला पइसा फुल नीयन झरेला
साँच बात त ई ह सब डरेरवा त हमरे मे परेला....!!!
   

Wednesday, October 2, 2013

समाज मे फइलल खोट

लोग के मन उमरल पैर खीचे के खोट
पइसा मीले के चाही बस इनका मोट,,
अक्कील के आंधर मुह के फुहर समाज
बुध्धी बगैर सब पीछुआइल बा आज,,
काम काज दुसर दिन पर थोपलें काका
किस्मत के परल सायकील सें चापा,,
का करी रघुआ बेचारा बाबुजी के बगैर
कापी कलम सें बा उनका जनम के बैर,,
देखी किस्मत आउर केतना खेल खेली
बैरी पढ़ाइ कें लोग आउर केतना दुख झेली,,
नाही नाता हमसें समाज के कउनो लोग सें
बड़ा खुश होला लोग बबलु के वियोग सें...