Thursday, September 19, 2013

चुटकुला हिन्दी में...

एक शायराना चुटकुला
वो बोले “महफिल में कहीं हमारे जूते खो गए अब हम घर कैसे जाएंगे?”
हमने कहा “आप शायरी शुरू कर दीजिए इतने आएंगे कि फिर गिन भी नहीं पाएंगे.”

लड़के और लड़की की बातएक लड़का रास्ते में चलते-चलते ठोकर खाकर गधे के सामने गिर गया.
उसी वक्त वहां से एक लड़की गुजर रही थी,
उसने लड़के को छेड़ते हुए कहा: अपने बड़े भाई का आशीर्वाद ले रहे हो क्या ?
लड़के ने जवाब दिया, आपने सही फरमाया भाभी जी.

शराबी चुटकुलासंता शराब पीकर लौटा,
और घर का ताला खोलने लगा, लेकिन हाथ कांपने की वजह से खोल नहीं पा रहा था.
बंता : ला दे यार, ताला मैं खोल देता हूं.
संता: ताला मैं खोल लूंगा, तू सिर्फ मकान पकड़ ले.

शादी का लड्डूपत्नी : आपको पता है, आपका दोस्त एक पागल लड़की से शादी करने जा रहा है.
पति : तो मैं क्या करूं.
पत्नी : अरे, आप उसे रोकेंगे नहीं?
पति : क्यों रोकूं?  उस साले ने मुझे रोका था क्या?


Monday, September 16, 2013

नया समाज के बदलल विचार

आस निराश मे आपन समाज आज बेहाल बा,पर नया युग के साथ साथ चल रहल आपन नौजवान भाई लोग के बहुत बड़ा उपकार ह की आज भोजपुरीया समाज के कुछ हद तक,इज्जत बढ़ल बा, आज बीहार के आगे लावे में सबसे बड़ा हाथ कउनो नेता मंत्री के ना,हमार समाज के नया होनहार लइका लोग के बा,जे आजकल के परीवेश मे उहे आधार पर चल रहल बारे जइसन एह वक्त जिये ला उपयुक्त माहौल बा,आजकल के पढ़ल लीखल लइका जहां तम्बाकु,बीड़ी,सीगरेट,शराब से तौबा कर रहल बा,लागत ह जइसें जन्म के बैर ह नशा से,हमनी के युग मे दसवी क्लास के लइका में जहां28%तम्बाकु (खैनी) खाय वाला लोग रहे उ आज सर्वे में6% रह गइल बा, इ एक तरह से बहुत ही बढ़िया सोच उभर के आइल बा लोग के सामनें,अगर रउआ छोट मोट शहर के बजार छोड़ दी त दारु पीये वाला में भी भारी कमी आइल बा,एहसे सरकार के बहुत नुकसान हो रहल बा,लेकीन फायदा हमनी के आपन समाज के बहुत भइल बा, पर हमनी के हार में ही हमनी के समाज आ संसकार के हार बा ,इ बात आज कल के युवा लोग बहुत अच्छा तरहसे जान गइल बारें,आ फेर से सभ्य समाज के वापसी ला लोग हमेशा हर छेत्र मे प्रयास कर रहल बारें,,,
अब हमनी के कुछो सोचें ना परी
लोग आहें बढीहे देह केतनो जरी,
जेहरी के धन बहुत लुटइले बानी
अब चुल्हा भी आपन शान से जली,
सरकार के सहयोग ना मीले त का
हमनी के दुआर पर ढिबरीयो ना जरी.?

Friday, September 6, 2013

हमार बचपन

कुछ कहें से पहीले हम बतावे चाहत बानी आपन परिचय के बारें मे,हम बीहार छपरा जीला के दिघवारा प्रान्त के नजदीक गाँव मोहन कोठीयाँ के रहे वाला बानी,गाँव के बहुत ही गरीब अवस्था मे हमार बचपन गुजरल बा,लपटउआ रोटी लेहके स्कुल के तरफ रवाना होत रही स, सब दोस्तन लोग खाते खाते स्कुल के ओर रवाना हो जात रही,स्कुल के फीस दस रुपया रहे जेहके परीवार वालन के उठावे में बहुत दिक्कत होत रहे, आ होए भी त काहे ना दुसर कोई भी रास्ता ना रहे पइसा पास मे आवेके,दादाजी के कमाई रहे जेहसे छोट परीवार हमार बहुत ही पइसा के किल्लत सें,खुशी पुर्वक चलत रहे, भगवान के दया ह की आजकल हम उ जमाना से उबर गइल बानी,आजकल शहर के जीवन मे आपन काम काज में लागल बानी,जेहसे घर परीवार खुशहाल बा हमार मेल आई डी ,,mohankothiyan@gmail.com  फेसबुक के एगो हमार पेज बा आपन घर दुआर- जेहसे हम प्रयास करीला बाह परदेश मे बसल लोग के एक जुट करेके,हम त इ मानीले बीहार के झुठ मुठ के बदनाम कइल जाला,जबकी बीहार मे अभी आउर कउनो प्रान्त से संसकार,सुविचार बहुत बडीया बा,हा कुछ लोग के पास पइसा के अभाव बा जेहके उ लोग मेहनत से दुर करे खातीर दिन रात लागल बा लोग.
       दुख के हरे वाला भगवान कब खुश होइहें, ,इ एगो सवाल हर वक्त हमार दील मे बसेला,बाकी भागवान के एहमें कउनो दोश कइसे लगाई जब सारा अवगुण के खान हमार आपन समाज ही बा,