बहुत पुरान होला के मतलब पुरनिया, इ उमर के उ पड़ाव ह जहाँ सें बचपन उल्टा गिनती शुरु करेला, जइसे जइसे लोग पुरनिया होत जालें हरकत लइकाई वाला करें लागेलें जा..
हमनी के समाज में उनकर उपहास बहुते अजीब तरहा से उड़ावे ले लोग, खास करकें उनके बेटा पोता चाहें चलाक दुसरो लोग, जे भुल जाले की ....
हमरो जिनगी मे इ दिनवा एक दिन आई,
तब राउरो बेटा पोता करीहें एहके भरपाई,
ना टुटी ना रोटी,बांध ना पाईम आपन लंगोटी,
पलंग छिनाई मिल जाई फाटल गेनरा चटाई..
जांगर देह सुखी झुली लाठी के सहारें
नोचें वाला चिल्होर दुनियाँ में बहुते बारें
झिझिरी खेलतें रही जाईम नदिया बिचे
अबही उमर बहुतें,उबलाई जन बइठी किनारें..
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