काहे ला करी तहसें निस्तानी
अमिरवन संघे जंग जुबानी
जानत बानी हार जाईम
चली नाही हमार मनमानी,
ॠगार के भुखाईल शरीर बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!
केतना दीन रहबु तु घघाईल
चुपचाप देखम तहार अगराईल
रोजी रोटी करम के लेखा
सब गुण रहते करी अनदेखा
पुरनकी मुरचाईल जंजीर बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!
जिनगी बसवारी खानी ह
लोग कहेले इ चलानी ह
ठंडी में उहें कुदारी चलावस
ना उखड़ला पर कहस उहें
इ बसवारी खानदानी ह,
सिजन मे हम खरीफ बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!
छाती प मुँग दरात बावे
इ दरद उनकर कराह बावे
दमरी फेकी नाच नचावें
इ दरदो उनका खुबे भावें,
दहार में पवरत अधीर बानी
आजुओ हम गरीब बानी !!
Monday, February 10, 2014
आजुओ हम गरीब बानी
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